ओ मेरी माँ आत्मा।
बेटी सी परि उत्तमा।
बहन जैसी दोस्ती कहाँ।
दोस्ती की है तू आस्था।
नाता और रिश्ता की है तू परिपूर्णता।
जिंदगी की आसरा बन के आई तू देवता।
कैसे मैं तुझको कृतज्ञ्यता प्रकट करू
सोचते सोचते जब दिमाग में सोच कम पड़ गए
तो दिल ने बोला तुझ को कैसे मैं सोचू तुझे कैसे मै पुकारू
शीश झुकाके सिर्फ इतना ही कह सकूँ।
प्रकृती के रूप है तू।
प्यार की है प्रेरणा तू।
प्रेरणा की आत्मा है तू।
गुरु के आदि गुरु माँ है तू।
परिवार की संवृद्धि है तू।
दुनिया केलिए भगवान की आशीर्वाद रूप हैं। हे स्त्री महान है तू ।
मनुष्य जीवन की पहली खूबसूरत नजारा माँ हैं तू
दुनियां मैं सबसे ताजा खुशी मन में महकाने वाली बेटी है तू
माँ पापा दोनों का प्यार दिखाती नादान अनमोल बहन है तू
आदि भौतिक रूप से - आत्मा बनजाने तक जीवन सफर में
आजन्मान्तर भाग्य स्वामिनी बनकर जीवन को सफल बनाने वाली दोस्त है तू।
ओमकार (अ + उ + माँ) के आत्मा तुझे प्रणाम
भगवान का रूप दाता...तुझ को प्रणाम ...
प्राण दाता प्रणाम
प्रणाम के परिणाम स्वरूपा तुझ को प्रणाम।
ఆది భౌతికం నుండి ఆత్మగా మారే ఈ జీవన ప్రయాణం లో
అమ్మ గా కూతురిగా సహోదరిగా స్నేహితురాలిగా ఆజన్మాంతర భాగస్వామిని గా
జీవనసాఫల్యతని, జీవితానికి పరిపూర్ణతని ఇచ్చే దేవతా నీకు హృదయపూర్వక ప్రణామం.
ప్రణామ సాఫల్య ప్రతిరూపమా నీకు శిరసా ప్రణామం.
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